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बसंत पंचमी

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बसंत ऋतु का आगमन बसंत पंचमी पर्व से होता है। शांत, ठंडी, मंद वायु, कटु शीत का स्थान ले लेती है तथा सब को नवप्राण व उत्साह से स्पर्श करती है। पत्रपटल तथा पुष्प खिल उठते हैं। स्त्रियाँ पीले- वस्त्र पहन, बसंत पंचमी के इस दिन के सौन्दर्य को और भी अधिक बढ़ा देती हैं। लोकप्रिय खेल पतंगबाजी, बसंत पंचमी से ही जुड़ा है। यह विद्यार्थियों का भी दिन है, इस दिन विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा आराधना भी की जाती है।   बसंत का अर्थ  बसंत ऋतु तथा पंचमी का अर्थ है- शुक्लपक्ष का पाँचवां दिन अंग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार यह पर्वजनवरी-फ़रवरी तथा हिन्दू तिथि के अनुसार माघ के महीने में मनाया जाता है। बसंत ऋतु बसंत को ऋतुओं का राजा अर्थात सर्वश्रेष्ठ ऋतु माना गया है। इस समय पंचतत्त्व अपना प्रकोप छोड़कर सुहावने रूप में प्रकट होते हैं। पंच-तत्त्व- जल, वायु, धरती, आकाश और अग्नि सभी अपना मोहक रूप दिखाते हैं। आकाश स्वच्छ है, वायु सुहावनी है, अग्नि (सूर्य) रुचिकर है तो जल पीयूष के समान सुखदाता और धरती उसका तो कहना ही क्या वह तो मानों साकार सौंदर्य का दर्शन कराने वाली प्रतीत ह...

मकर संक्रांति 2012

इस वर्ष सूर्यदेव 15 जनवरी को उत्तरायण में प्रवेश करेंगे। सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश होते ही संक्रांति का पर्व मनता है। इस बार 14 जनवरी की मध्य रात्रि को सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करेगा। ऐसे में स्नान-दान आदि के रूप में मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही संक्रांति का पुण्य काल भी शुरू हो जाएगा। सांवलियाजी मंदिर मंडल के मुख्य पंडित विश्वनाथ आमेट ने बताया कि 14 जनवरी की रात 12.56 बजे से संक्रांति का पुण्यकाल शुरू होगा, जो 16 घंटे का होता है। पुण्यकाल 15 जनवरी सूर्योदय से शाम 4.55 मिनट तक रहेगा। उदय तिथि के सिद्धांत अनुसार मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। पं. आमेट ने बताया कि सूर्य का राशि परिवर्तन रात के समय होने से महंगाई और बढऩे का अंदेशा है। दूध, दही, घृतादि, मणि-रत्न, श्याम रंग के वस्त्र, सफेद रंग की वस्तुएं लहसुन, चावल, स्टील आदि के मूल्यों में वृद्धि होने की संभावना है। मकर संक्रांति प्रवेश के समय तुला लग्न अनुसार लग्न में उच्चस्थ शनि सप्तम भाव बृहस्पति से दृष्ट है। धनेश लाभ भाव में होने से वर्षा अनुकूल रह...