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चन्द पंक्तियाँ

ये चन्द पंक्तियाँ जिसने भी लिखी है खूब लिखी है : ➖➖➖➖➖ एक पथ्थर सिर्फ एक बार मंदिर जाता है और भगवान बन जाता है .. इंसान हर रोज़ मंदिर जाते है फिर भी पथ्थर ही रहते है। ➖➖➖➖➖ एक औरत बेटे को जन्म देने के लिये अपनी सुन्दरता त्याग देती है....... और वही बेटा एक सुन्दर बीवी के लिए अपनी माँ को त्याग देता है। ➖➖➖➖➖ जीवन में हर जगह हम "जीत" चाहते हैं... सिर्फ फूलवाले की दूकान ऐसी है जहाँ हम कहते हैं कि "हार" चाहिए.. क्योंकि हम भगवान से "जीत" नहीं सकते। ➖➖➖➖➖ हम और हमारे ईश्वर, दोनों एक जैसे हैं.. हम दोनों ही रोज़ भूल जाते हैं.. वो हमारी गलतियों को.. और हम उसकी मेहरबानियों को। ➖➖➖➖➖ वक़्त का पता नहीं चलता अपनों के साथ..... पर अपनों का पता चलता है, वक़्त के साथ... वक़्त नहीं बदलता अपनों के साथ, पर अपने ज़रूर बदल जाते हैं वक़्त के साथ। ➖➖➖➖➖ ज़िन्दगी पल-पल ढलती है, जैसे रेत मुट्ठी से फिसलती है... शिकवे कितने भी हो हर पल, फिर भी हँसते रहना.. क्योंकि ये ज़िन्दगी जैसी भी है, बस एक ही बार मिलती है। 🙏🙏🙏🙏🙏🙏 Sent from my Windows Phon...

हमारी परंपराओं के पीछे के वैज्ञानिक रहस्‍य

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हमारी परंपराओं के पीछे कई सारे वैज्ञानिक रहस्‍य छिपे हुए हैं, जिन्‍हें हम नहीं जान पाते क्‍योंकि इसकी शिक्षा हमें कहीं नहीं दी गई है। भगवान शिव को सावन के महीने में ढेरो टन दूध यह सोंच कर चढ़ाया जाता है कि वे हमसे प्रसन्‍न होंगे और हमें उन्‍नती का मार्ग दिखाएंगे। लेकिन श्रावण मास में शिवलिंग पर दूध चढ़ाने के पीछे क्‍या कारण छुपा हुआ है | भगवान शिव एक अकेले ऐसे देव हैं जिनकी शिवलिंग पर दूध चढ़ाया जाता है। शिव भगवान दूसरों के कल्याण के लिए हलाहल विषैला दूध भी पी सकते हैं। शिव जी संहारकर्ता हैं, इसलिए जिन चीज़ों से हमारे प्राणों का नाश होता है, मतलब जो विष है, वो सब कुछ शिव जी को भोग लगता है। धतूरे जैसी विषैली चीज को हम शिव को अर्पित करते हैं!! चलो अब मुद्दे की बात – 1. वात-पित्त कफ, इन तीनों के असुंतलन से बीमारियाँ होती हैं और श्रावण मास वात की बीमारियाँ सबसे अधिक होती हैं। थोड़ा वात के बारे में बता दें – “वात के बिगड़ने से मुख्यतः ८० विमारियां होती है जैसे हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न, याद दास्त की कमी ,फटी एड़िया, सूखी त्वचा, किसी भी तरह का दर्द, लकवा, भ्रम, विषाद, कान व आ...

ॐ के लाभ:

ॐ के 11 शारीरिक लाभ: ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है। अ उ म् । "अ" का अर्थ है उत्पन्न होना, "उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, "म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है। जानीए ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक और अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग... 1. ॐ और थायराॅयडः- ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। 2. ॐ और घबराहटः- अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं। 3. ॐ और तनावः- यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। 4. ॐ और खून का प्रवाहः- यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है। 5. ॐ और पाचनः- ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है। 6. ॐ लाए स्फूर्तिः- इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है। 7. ॐ...